राम मंदिर दान घोटाले में वकीलों ने आरोपियों का किया बहिष्कार, CBI जांच की मांग
- श्वेता रंजन
राम मंदिर दान में गबन को लेकर अयोध्या की फैजाबाद बार एसोसिएशन ने बड़ा फैसला लेते हुए आरोपियों के लिए वकालत करने से इनकार कर दिया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इस घोटाले की CBI जांच कराने की मांग वाली याचिका को गर्मियों की छुट्टियों के बाद सुनवाई करने की बात कही है।
राम मंदिर के लिए मिले दान में घोटाले व गबन को लेकर आम लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। साथ ही अयोध्या में फैजाबाद बार एसोसिएशन ने ऐलान किया है कि उसकी बार का कोई भी वकील इस मामले में गिरफ्तार 8 आरोपियों के लिए कोर्ट में पैरवी नहीं करेगा। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गर्मियों की छुट्टियों के बाद वह उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें इस मामले की सीबीआई जांच कराने और तय समय-सीमा में जांच पूरा कराने की मांग की गई है।
फ़ैज़ाबाद बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने यह भी तय किया कि अगर उसकी बार का कोई सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों की अदालत में पैरवी की कोशिश करता है, तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। बार ने मांग की है कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव-जो सभी मंदिर के मैनेजमेंट से जुड़े हैं लेकिन जिनका नाम एफ़आइआर में नहीं है, उन्हें अयोध्या 'छोड़ देना चाहिए'।
बार ने चेतावनी दी है कि अगर ये तीनों 3 दिनों में शहर से बाहर नहीं गए, तो पूरे अयोध्या शहर की घेराबंदी कर दी जाएगी और किसी को भी अंदर आने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद ने कहा कि वे इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर हाई कोर्ट भी जाएंगे। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने 2005 में भी ऐसा ही फैसला लिया था, जब राम जन्मभूमि परिसर में आतंकवादी हमले के आरोपियों को फैजाबाद अदालत में पेश किया गया था, तब लखनऊ के एक वकील ने इस मामले में आरोपियों के लिए पैरवी की थी।

