साइबर क्राइम में ठगी के बढ़ते मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख दिखाया है, चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने साइबर क्राइम में धोखाधड़ी के मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि साइबर अपराध समाज के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्ती करने की जरूरत है ताकि लोगों का भरोसा बना रहे और अपराधियों को हौसला न मिले।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि साइबर अपराधी“परजीवी” जैसा हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसे लोग दूसरों की मेहनत की कमाई को निशाना बनाते हैं और समाज को नुकसान पहुंचाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साइबर ठगी करने वाले लोग आम नागरिकों की बचत और जीवनभर की जमा पूंजी तक हड़प लेते हैं, इसलिए इनके प्रति नरमी दिखाना बिल्कुल भी सही नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि ऐसे अपराधियों को जेल में रखना समाज के हित में है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध अब किसी एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं है, कई आरोपी एक राज्य में अपराध करते हैं और फिर दूसरे राज्यों में जाकर अपनी गतिविधियां जारी रखते हैं, इससे जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है।कोर्ट ने कहा कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए इनसे निपटने के लिए मजबूत व्यवस्था की जरूरत है।

ऑनलाइन ठगी पर पहले भी दिखा चुका है कोर्ट सख्त रुख- हाल के महीनों में डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी के कई मामले सामने आए हैं, इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी ऐसे मामलों का स्वतः संज्ञान लिया था। इस मामले में अंबाला के एक बुजुर्ग दंपत्ति ने अदालत को पत्र लिखकर अपनी आपबीती बताई थी, उन्होंने बताया था कि साइबर ठगी में उनकी जीवनभर की जमा पूंजी चली गई। इस घटना के बाद अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट इससे पहले भी साइबर क्राइम को रोकने के लिए कई अहम निर्देश दे चुका है। कोर्ट ने CBI को डिजिटल ठगी के मामलों में कार्रवाई करने की छूट दी थी, साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों को भी ऐसे अपराधों पर रोक लगाने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया था. कोर्ट का मानना है कि साइबर अपराध के खिलाफ सिर्फ पुलिस ही नहीं, बल्कि सभी एजेंसियों और सरकारों को मिलकर काम करना होगा, इसी वजह से अदालत लगातार ऐसे मामलों पर नजर बनाए हुए है।