सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ के निर्माताओं को सख्त चेतावनी दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी समुदाय या वर्ग का अपमान करना स्वीकार नहीं है, चाहे वह सिनेमा का नाम हो या कंटेंट हो। ब्राह्मण संगठनों द्वारा नेटफ्लिक्स प्रोडक्शन वाली इस थ्रिलर पर विरोध जताने के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।

सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए फ़िल्म निर्माताओं से सफाई मांगी है, सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि विवादित नामों का इस्तेमाल अक्सर पब्लिसिटी के लिए किया जाता है, लेकिन यह स्वीकार्य नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर निर्माताओं और नेटफ्लिक्स से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी, जिसमें यह तय होगा कि फिल्म किस नाम से रिलीज़ होगी और क्या इसमें किसी वर्ग के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री है।

गौरतलब है कि इस फिल्म का टीजर गत 3 फरवरी को लॉन्च हुआ, जिसमें मनोज बाजपेयी भ्रष्ट पुलिसवाले ‘पंडित’ अजय दीक्षित बने हैं। लेकिन फिल्म के टाइटल पर ही हंगामा मच गया। लखनऊ में हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज होते नजर आया और प्रयागराज में परशुराम सेना का पुतला फूंका गया। वीएचपी ने इसे ब्राह्मणों पर हमला बताया।

दूसरी तरफ फिल्म निर्माता नीरज पांडे ने सफाई दी कि यह किसी जाति पर नहीं, बल्कि एक कमजोर इंसान की कहानी है, लेकिन विरोध नहीं रुका।

दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही नाम बदलने की सहमति पर याचिका निपटा चुका था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि भावनाओं को ठेस पहुंचाना गलत है। अखिलेश यादव ने भी ट्वीट कर इसे जातिवादी करार दिया। अब मेकर्स पर फिल्म की रिलीज को लेकर दबाव बना हुआ है।

यह मामला फिल्म के शीर्षक को लेकर शुरू हुआ था, जिसमें ‘पंडत’ शब्द के इस्तेमाल पर विरोध दर्ज किया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह नाम एक समुदाय को अपमानित करता है और समाज में गलत संदेश देता है।