शरीयत उत्तराधिकार कानून को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी
- Kanoon Live
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण शरीयत उत्तराधिकार कानून को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एक जनहित याचिका पर जारी किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करने का निर्णय लिया है, जिसमें कहा गया है कि 1937 के मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन अधिनियम के तहत उत्तराधिकार और वसीयत संबंधी प्रावधान महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण हैं।
चीफ सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका लखनऊ की वकील पौलोमी पाविनी शुक्ला और आयशा जावेद द्वारा, अपने संगठन ‘न्याया नारी फाउंडेशन’ की ओर से दायर की गई थी।
कोर्ट में एडवोकेट प्रशांत भूषण और निहाल अहमद ने पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि शरीयत के तहत उत्तराधिकार और वसीयत के प्रावधान “आवश्यक धार्मिक प्रथाएँ” नहीं हैं। इसके बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगते हुए नोटिस जारी करने का निर्णय लिया।
एडवोकेट भूषण ने कहा, “यह कहना कि महिलाओं को उनके पुरुष समकक्षों की तुलना में आधा या उससे भी कम हिस्सा मिलेगा, स्पष्ट रूप से भेदभावपूर्ण है। यह एक सिविल मामला है, न कि अनुच्छेद 25 के तहत कोई आवश्यक धार्मिक प्रथा।”
उन्होंने यह भी बताया कि वसीयत के मामले में भी एक मुस्लिम अपनी संपत्ति के एक-तिहाई (1/3) से अधिक की वसीयत नहीं कर सकता। इस प्रकार, मुस्लिम अपने स्वयं अर्जित संपत्ति के बारे में भी अपनी इच्छा के अनुसार पूरी तरह वसीयत नहीं कर सकते।

