NCERT में विवादित Chapter लिखने वाले पहुँचे सुप्रीम कोर्ट, दायर की याचिका
- श्वेता रंजन
एनसीईआरटी की किताब में विवादास्पद अध्याय ‘करप्शन इन ज्यूडिशियरी’ लिखने वाले शिक्षाविदों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होने कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके काम पर लगाई गई रोक को हटाया जाए।
गौरतलब है कि एनसीईआरटी यानी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से संबंधित ‘विवादित’ सामग्री वाले अध्याय को लेकर उठे विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया था जिसमें इन तीनों शिक्षाविदों को किसी भी सरकारी संस्थान में बतौर विशेषज्ञ सेवा देने से रोक दिया गया था.
इन तीनों शिक्षाविदों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में कहा कि सामग्री का मसौदा तैयार करने में किसी एक व्यक्ति का एकाधिकार नहीं था, बल्कि यह एक सामूहिक प्रक्रिया थी.
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को अवगत कराया गया कि तीनों विशेषज्ञ (प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, उनकी सहयोगी सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार) कोई गैर भरोसेमंद ‘अस्थायी व्यक्ति’ नहीं हैं, बल्कि उनकी ‘काफी विश्वसनीयता’ है.
आलोक प्रसन्न कुमार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पिछली टिप्पणियों से उन्हें बहुत नुकसान पहुंचा है, इसलिए उन्होंने अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए आवेदन दायर किए हैं. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने ने एडवोकेट शंकरनारायणन से पूछा, ‘ क्या आप अपने कार्यों का बचाव कर रहे हैं?’
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि शिक्षाविद संदर्भ प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं और उनका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार लागू हुई नई शिक्षण पद्धति को न्यायालय के सामने प्रस्तुत करना है, जिसमें अन्य मुद्दे भी शामिल हैं. कक्षा छह और सात की पाठ्यपुस्तकों में अन्य मुद्दों का भी उल्लेख है जिनका सामना विधायिका, कार्यपालिका और निर्वाचन आयोग को करना पड़ता है.

